बदायूंबिसौली
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जश्ने ईदुल फित्र के मौक़े पर बज़मे सदाए अदब ने किया मुशायरे का आयोजन।

बिसौली (बदायूं )
बीती रात बज़्म ए सदाए अदब की जानिब से जश्ने ईदुल फित्र मनाते हुए एक तरही मुशायरा एम जे आर पब्लिक स्कूल ज़मीर मंज़िल पर समाज सेवी व व्यवसायी हाजी एम सग़ीर की अगुवाई में मुनक्किद हुआ। जिसका मिसरा ए तरह था
*जिब्रील भी नबी की अदा देखते रहे*
मुशायरे का आगाज़ मेहमान शोरा ने शमा रौशन करके किया। आगाज़ में कलाम पढ़ते हुए हमज़ा खान हमज़ा ने कहा कि
हमज़ा ये किस मक़ाम पे ले आई है तलब
ख़ुद को भुला के उनको सदा देखते रहे।
वहीं फहीम अहमद फहीम ने अपने अंदाज़ में बयान किया
आले रसूले पाक की अज़मत न पूछिये
हम उनके नक़्श पा में शिफ़ा ढूंढते रहे
उनके बाद माजिद अली माजिद ने अपना इजहार ख्याल यूँ पेश किया कि
रोज़े अजल से जिसकी ज़या देखते रहे
वो नूर दिल में जलवा नुमा देखते रहे
शब्बर ने कुछ यूँ फ़रमाया कि
कभी ज़मीं पे कभी अर्श उला देखते रहे
जिब्रील भी नबी की अदा देखते रहे।
आलम बेग आलम ने फ़रमाया कि
कश्ती उन्हीं की डूबी है साहिल के आस पास
जो ना ख़ुदा में अपना ख़ुदा देखते रहे।
डा अमिरुद्दिन अमीर ने कहा कि
लोगों ने खूब देखीं मदीने की वादियां
बीमारे नबी खाके शिफ़ा देखते रहे
अभीक्ष पाठक आहत ने फ़रमाया कि
हक़ के खिलाफ होके भी आहत नहीं है जो
ऐसे मुनाफ़िको की दग़ा देखते रहे मशहूद खाँ हमदम ने अपने अंदाज़ में अर्ज़ किया कि
मेराज के सफर में मुहम्मद की वो हया
श्री दत्त शर्मा मुज़्तर ने फ़रमाया
ऐसे भी हक़परस्त हुए हैं जहान में
मिटने में अपने सबका भला देखते रहे।
फ़रीद इदरीसी ने कहा कि
क़िस्मत पे अपनी नाज़ा सफर में बुराक़ था
जिब्रील भी नबी की अदा देखते रहे।
क़ासिम ख़ैरवी ने सुनाया कि
ईरान ने ही ज़ुल्म का डट कर दिया जवाब
एहले अरब तो जश्ने क़ज़ा देखते रहे
मशकूर अहमद नज्मी ने फ़रमाया कि
मेराज को वो माइले परवाज़ जब हुए
जिब्रील भी नबी की अदा देखते रहे।
मेहमान शायर सुरेन्द्र नाज़ बदायूंनी ने फ़रमाया
आँखों से दिल की जिनको सदा देखते रहे
हज़रत उवैस उनकी क़बा देखते रहे।
सदारत कर रहे मेहमान शायर अहमद अमजदी ने अपने अंदाज़ में कहा कि
हम क्या बताएं आपको क्या देखते रहे
सर अपना उनके दर पे झुका देखते रहे
वक्फे के बाद बहारिया दौर भी चला जिसमें सभी शोरा ने बेहतरीन कलाम पेश किये।
मुशायरे की सदारत अहमद अमजदी बदायूंनी ने व निज़ामत के फ़राइज़ डा अमिरुद्दिन अमीर ने अदा किये। मुशायरा देर रात चला। आख़िर में आयोजक हाजी एम सग़ीर ने सभी का शुक्रिया अदा किया। इस मौक़े काफी तादाद में अदब नवाज़ मौजूद रहे।

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