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मुहब्बत का कोई बदला नहीं है———- चराग-ए सुखन के मासिक तरही मुशायरे में शायरों ने बांधा समां

  1. बदायूँ। चराग-ए सुखन संस्था के मासिक तरही मुशायरे में शायरों ने समां बांध दिया। मोहल्ला सोथा स्थित कार्यालय फरशोरी हाउस पर आयोजित मुशायरे में बेहतरीन कलाम सुनाकर शायरों ने खूब वाहवाही लूटी। सबसे पहले दानिश बदायूंनी ने तरह में नात ए पाक पढ़कर नशिस्त का आगाज किया।सदारत कर रहे सादिक अलापुरी ने जुदा अंदाज में सुनाया-
    अभी तक जेबो दामाँ हैं सलामत,
    जुनूँ हद को अभी पहुंचा नहीं है।

    वरिष्ठ शायर सुरेन्द्र नाज ने कहा-
    तुम्हारे नाम की रेखा नहीं है,
    मिरे हाथों में वरना क्या नहीं है।

    अल्हाज आज़म फरशोरी ने कलाम पेश किया-
    तेरे दामन पे गर धब्बा नहीं है,
    मेरा किरदार भी मैला नहीं है।

  2. डॉ दानिश बदायूंनी ने ईद पर अशआर पढ़ने के बाद ग़ज़ल सुनाई-सुनेगा वो भला कैसे किसी की,
    जो बेटा बाप की सुनता नहीं है।संचालक युवा शायर अरशद रसूल ने भावनाएं यूं व्यक्त कीं-
    अगर जहमत न हो इंसान बन जा,
    ये मेरी राय है फतवा नहीं है।

    कुमार आशीष ने होली गीत सुनाने के बाद ग़ज़ल पढ़कर समां बांध दिया-
    तू मेरा हो के भी मेरा नहीं है,
    ये रिश्ते की तो परिभाषा नहीं है।

    युवा शायर शम्स मुजाहिदी बदायूंनी ने गजल यूं पढ़ी-
    है बदला शम्स हर इक शय का लेकिन
    मुहब्बत को कोई बदला नहीं है।

    इसके अलावा शहाबुद्दीन, रजत गौड़ आदि मौजूद रहे।

    अगला तरही मुशायरा 18 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा जिसका मिसरा होगा – दास्तां लिखने लगा हूं अब ‘ ज़माने’ के लिए

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