आशा कर्मियों ने किया जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन।
बदायूँ।उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन बदायूं जिलाध्यक्ष जौली वैश्य के नेतृत्व में सैकड़ों आशा कर्मियों ने जिला मुख्यालय पर एकत्र होकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगो को बुलंद किया और मांगपत्र के साथ 15 दिसंबर से प्रस्तावित हड़ताल का नोटिस दिया।
जौली वैश्य ने कहा कि सरकार से अपने सवालों के समाधान की गुहार के सभी तरीके नाकाफी रहे तभी हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा।
सरकार से उम्मीद थी कि वह वार्ता बुलाकर समस्याओं का समाधान करने का रास्ता निकालेगी,किंतु सरकार ने दमन का रास्ता लिया है। हड़ताल पर पाबन्दी लगाकर सरकार हमारे सवालों से मुंह बचाने और हमारे संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने की कोशिश कर रही है।
इस पाबंदी से आशा कर्मियों के सवाल हल नहीं हो जायेंगे और नहीं उनकी लड़ाई रूकेगी। इसलिए सरकार को दमन का रास्ता छोड़कर वार्ता करनी चाहिए।
जिला सचिव मुनीषा ने कहा कि सरकार और नौकरशाही गुलामी और बेगार के जरिए श्रम और पारिश्रमिक की लूट कर रही हैं। 70 कामों के बदले 70 रु दैनिक भी नहीं देने वाली सरकार दमन के सिवा और कर ही क्या सकती है। पर आशा कर्मी सरकार के हर दमन का मुकाबला करने को तैयार हैं,अब बेगार और भूखे पेट काम नहीं करेंगी।
उपाध्यक्ष निर्दोस राठौर ने कहा कि हमारा वर्षों से लाखों रु का पारिश्रमिक बकाया हैं। सरकार उसे भी देने को तैयार नहीं है। कोविड की केंद्रीय अनुतोश राशि, राज्य वित्त का 28 माह का सम्पूर्ण भुगतान ,आभा ,आयुष्मान कार्ड ,गोल्डन कार्ड में योगदान सहित पोलियों,फाइलेरिय़ा ,कुष्ठ रोग ,संचारी ,दस्तक जैसे योगदानों का पैसा डकार लिया गया। सरकार सुनने के बजाय पीटने की कार्यवाही कर रही है।
मनीषा ने कहा कि न्यूनतम वेतन की गारंटी ,स्वास्थ्य,जीवन बीमा , ईपीएफ, ई एस आई,ग्रेच्युटी ,मातृत्व अवकाश दिए जाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।





