*वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में तकनीकी संकट: समय सीमा बढ़ाना अनिवार्य*
देशभर में वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और डिजिटलीकरण के उद्देश्य से शुरू किया गया उम्मीद पोर्टल फिलहाल गंभीर तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है। सरकार द्वारा निर्धारित 5 दिसंबर 2025 की अंतिम तिथि बेहद नजदीक है, लेकिन पोर्टल की स्थिति ऐसी है कि अधिकांश वक्फ बोर्ड, मुतवल्ली और संपत्ति प्रबंधक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ही नहीं पा रहे। लगातार सर्वर डाउन होना, फ़ॉर्म का सेव न होना, दस्तावेज़ अपलोड में त्रुटियाँ, लॉगिन आदि क़ी समस्याएँ इन सभी ने मिलकर पंजीकरण को एक चुनौती नहीं बल्कि एक बड़ी कठिनाई में बदल दिया है।
सैकड़ों मुतवल्ली और संस्थाएँ यह बता चुकी हैं कि कई दिनों के प्रयास के बाद भी वे सिर्फ प्रारंभिक चरण तक पहुँच पा रहे हैं। कुछ तो अपनी संपत्तियों का विवरण दर्ज करने के बाद भी यह देखकर निराश हैं कि पोर्टल ने डेटा को सेव ही नहीं किया। इसके चलते दोबारा पूरा विवरण भरना पड़ता है, जिससे समय, मेहनत और संसाधनों का नुकसान हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ इंटरनेट की स्थिति पहले से ही कमजोर है, वहाँ यह समस्या और गंभीर रूप ले चुकी है।
वक्फ संपत्तियाँ सिर्फ जमीन, इमारत या रिकॉर्ड नहीं हैं; वे समुदाय के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। मस्जिदें, मदरसें, कब्रिस्तान, खानकाहें, अनाथालय और अनेक सामाजिक कल्याण केंद्र इन्हीं संपत्तियों पर आधारित हैं। यदि पंजीकरण तकनीकी बाधाओं के कारण अधूरा रह जाता है, तो इन संपत्तियों पर अतिक्रमण, हेराफेरी या गलत प्रबंधन का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि प्रत्येक संपत्ति का सही और पूर्ण पंजीकरण बेहद आवश्यक है और यह तभी संभव है जब पोर्टल सुचारू रूप से काम करे और उपयोगकर्ताओं को पर्याप्त समय मिले। उक्त बातें समाजवादी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता निसार अहमद ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है.।
उन्होंने बताया है कि वर्तमान परिस्थिति में अंतिम तिथि को जस का तस बनाए रखना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि समुदाय के हितों के विरुद्ध भी है। यह स्पष्ट हो चुका है कि मौजूदा पोर्टल की क्षमता और उसकी वास्तविक स्थिति एक-दूसरे के अनुकूल नहीं। यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई गई तो आधे-अधूरे, जल्दबाज़ी में किए गए या तकनीकी त्रुटियों से भरे पंजीकरण उत्पन्न होंगे जो इस पूरे अभियान के उद्देश्य को ही कमजोर कर देंगे।
श्री अहमद ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री भारत सरकार से यह मांग किया है कि न केवल हमारी नीजी मांग है बल्कि समुदाय की सामूहिक आवाज़ अब एक ही मांग पर केंद्रित है, पंजीकरण की अंतिम तिथि तुरंत बढ़ाई जाए। अहमद ने कहा है कि सरकार को चाहिए कि पोर्टल की सभी तकनीकी खामियों को पहले पूरी तरह ठीक करे, उसके बाद पंजीकरण के लिए नई, व्यावहारिक और पर्याप्त समय-सीमा का ऐलान करे। यह कदम न केवल प्रशासनिक दृष्टि से उचित होगा, बल्कि वक्फ संपत्तियों की दीर्घकालिक सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए अपरिहार्य है।
वक्फ संपत्तियों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों की धार्मिक और सामाजिक विरासत को सुरक्षित रखने जैसा है। इसीलिए समय सीमा बढ़ाना आज के समय की सबसे जरूरी और जिम्मेदार मांग है ताकि हर वक्फ संपत्ति सही तरीके से दर्ज हो सके और समुदाय की यह धरोहर सुरक्षित रह सके।


