बदायूं
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आशाकर्मियों की हड़ताल का 46 वा दिन पूरा, सरकार ने रुकी हुई वार्ता को आगे बढ़ाकर उनकी मांगो को पूरा करने में कोई रुचि नहीं ।

बदायूं।आशाकर्मियों की हड़ताल का 46 वा दिन पूरा हो गया । किंतु अभी तक सरकार ने रुकी हुई वार्ता को आगे बढ़ाकर उनकी मांगो को पूरा करने में कोई रुचि नहीं दिखाई।
आज मालवीय आवास मैदान में धरने में जुटी आशा कर्मियों
की जिलाध्यक्ष जौली वैश्य ने कहा कि सरकार ने 20 वर्षों में आशा कर्मियों की खून की एक एक बूंद निचोड़ लिया है, बचा कुछ खून भी एकमुश्त प्रदेश की सत्ता में बैठे बहरे लोगों को देना चाहते थे,
आज खून से लिखा मांग पत्र माननीय उपविभागीय मैजिस्ट्रेट को सौंपा गया
उन्होंने कहा कि सरकार की संवेदन हीनता का यह जीता जागता उदाहरण है कि कड़कड़ाती सर्दी में बदायूं सहित प्रदेश की 1 लाख से अधिक आशा कर्मी खुले आसमान के नीचे बैठी रही ,सीएचसी से मुख्यालय और मंडल से होते हुए राजधानी तक सड़क पर जूझती रही किंतु सरकार सिर्फ अपना चेहरा बचाती रही और उसकी नौकरशाही झूठ बोलने तथा उत्पीड़न में लगी रही।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आगामी 2 फरवरी को अपना बजट प्रस्तुत करने जा रही है। इसलिए दिल्ली में बैठी सरकार को 45/ 46 वे भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों राज्य के साथ लागू करने के लिए बाध्य करने हेतु आगामी 30 जनवरी को गांधी भगत सिंह अम्बेडकर के रास्ते, आशा कर्मियों के बेहतर जीवन के वास्ते नारे के साथ मुख्यालयों पर प्रदर्शन और एक बार फिर 9 फरवरी को लखनऊ कूंच किया जाएगा।जौली ने अंत में कहा कि अबकी राजधानी से खाली हाथ लौटने के लिए नहीं ,मांगे पूरी न होने तक डेरा डालकर बैठने की दृढ़ता के साथ जाना होगा।
धरने को संबोधित करते हुए जिला सचिव मुनीषा ने कहा कि 30 तारीख को भारी संख्या में सभी को आना है और 9 फरवरी राजधानी में घेरा डालो आंदोलन की तैयारी में हम सभी को अभी से जुटना होगा।
ममता , ऊषा , किरण , निर्मला , सीमा , सरिता , रेखा , नन्ही देवी , रामेश्वरी , भवानी , सुमन , नीलम , रेणु आदि ने धरने को संबोधित किया।

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