बदायूं

हड़ताल का 28वा दिन – सरकार तक नहीं पहुंची आशा कर्मियों की आवाज – जौली वैश्य।

बदायूँ। हड़ताल के 28 वे दिन भी बदायूं के मालवीय मैदान में उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर जारी हड़ताल में शामिल आशा कर्मी डटी रही।
धरने पर बैठी आशा कर्मियों में सरकार के विरुद्ध तीखा आक्रोश व्याप्त है। सरकार की अनदेखी और चुप्पी पर तीखा हमला करते हुए जिलाध्यक्ष जौली वैश्य ने कहा कि सरकार ने आशा बहनों की दो तिहाई जिंदगी तो पहले ही छीन ली अब अगर बाकी का भी बलिदान चाहती है तो आशा कर्मी देने के लिए तैयार हैं किंतु मांगो को पूरा किए बिना अबकी सरकार बच नहीं सकती ।
उन्होंने कहा कि यह कैसी सरकार है जो समाज के सबसे कमजोर तबके की आवाज सुनना ही नहीं चाहती । तब किसकी आवाज सुनेगी, सिर्फ पूंजीपतियों, भ्रष्ट अधिकारियों के बल पर राज ज्यादा दिन नहीं चलता । और अब धैर्य का बांध टूटने वाला है। आखिर किसी का पारिश्रमिक भुगतान क्यों नहीं करना चाहती सरकार , आशा सिर्फ बेगार की पुतली नहीं है, जीती जागती आधी आबादी का वह हिस्सा हैं ,जिसने समाज को किसी सीमा में तैनात फौजी की तरह चैन की नीद सोने का आश्वासन दिया है। फाइलेरिया से देश प्रदेश को मुक्त कर एक पूरी पीढ़ी को कुपोषण के बावजूद विकलांगता से बचाया है। कोविड में अपनी महत्ता सिद्ध की है । किंतु सरकार हम आशा बहनों को कीड़े की तरह मसल देने में ही यकीन रखती है।
उन्होंने कहा बात करो, समस्याओं का समाधान करो, अहंकार और ताकत का अपने ही नागरिकों पर प्रयोग किसी भी शासक को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा देता हैं।
सचिव मनीषा सहित सभी ने आंदोलन को बिना थके ,बिना निराशा आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इसे मौके पर सरला , दीपमाला , रूबी , पिंकी , सुमन , कन्यावती, उर्वेश , वेश्यावती , रूपवती कमलेश, सरिता आदि आशाएं शामिल रही है।

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