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इस बार ऐतिहासिक रही अलविदा जुमा की नमाज़

बिसौली

अपने अज़ीज़ मुल्क भारत में इस वर्ष 2026 में रमज़ान के पाक महीने में एक अजीब और ऐतिहासिक व ख़ास संयोग बन गया है। जिस वजह से अलविदा जुमा (जुमातुल विदा) की नमाज़ दो बार अदा की गई। यह मौक़ा आज से लगभग 26 साल बाद आया है, वर्ष 1999 -2000 के बाद। जिससे मुस्लिम समुदाय में काफी उत्साह और जोशो खरोश देखने को मिला।
आइये जानते हैं क्या है अलविदा जुमा क्या है?
अलविदा जुमा ? इस्लामी मान्यता के अनुसार रमज़ान के आखिरी शुक्रवार को अलविदा कहा जाता है। इस दिन मस्जिदों में नमाज़ियों की भारी भीड़ होती है, लोग खास तौर पर दुआएँ मांगते हैं, तौबा करते हैं, सदका-ज़कात देते हैं और रमज़ान के आखिरी दिनों की बरकतों का लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। इस्लाम में इसे बहुत अफज़ल (उत्तम) दिन माना जाता है।
2026 में दो बार अलविदा क्यों हुआ?
रमज़ान का ही नहीं इस्लाम के समस्त त्यौहार चंद्र कैलेंडर पर आधारित होते है, इसलिए कोई महीना महीना 29 या 30 दिनों का हो सकता है। यह पूरी तरह शव्वाल का चाँद दिखने पर निर्भर करता है।
रमज़ान 2026 भारत में 19 फरवरी से शुरू हुआ था।
इस साल रमज़ान में कुल 5 जुमा (शुक्रवार) पड़ने की स्थिति बन गई 20 फरवरी, 27 फरवरी, 6 मार्च, 13 मार्च और 20 मार्च।
13 मार्च 2026 (रमज़ान का 23वाँ रोज़ा) को बहुत से लोग अलविदा जुमा मानकर नमाज़ अदा की, क्योंकि अगर रमज़ान 29 दिनों का होता (19 मार्च को चाँद दिख जाता), तो यही आखिरी जुमा होता।
चाँद न दिखने पर रमज़ान 30 दिनों का हुआ, और 20 मार्च 2026 को रमज़ान का 30वाँ दिन और आखिरी जुमा पड़ा। इस दिन भी अलविदा जुमा की नमाज़ अदा पुर्खुलुस माहौल में की गई, और कई जगहों पर इसे दूसरा अलविदा माना गया।
इस्लाम धर्म के कई उलेमा हज़रात ने इसे अल्लाह का खास तोहफा बताया क्योंकि रमज़ान के आखिरी दिनों में दो बार इस खास नमाज़ का मौका मिला।13 मार्च को पहला अलविदा जुमा बड़े पैमाने पर मनाया गया।20 मार्च को दूसरा अलविदा जुमा अदा हुआ, और उसी दिन या अगले दिन ईद-उल-फितर भी जुमा के दिन पड़ने का संयोग बना (कई देशों में आज 20 मार्च को ईद मनाई जा रही है )।

तमाम मस्जिदों में भारी भीड़ रही, लोग इसे ऐतिहासिक मानकर खुश हुए।
यह संयोग कैलेंडर, चंद्रमा की स्थिति और इस्लामी परंपरा का अनोखा मेल था, जिसने 2026 के रमज़ान को और भी यादगार बना दिया है ।
अलविदा जुमा मुबारक

 

 

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