बदायूंबिसौली
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काट लें तो मालिक कोई नहीं, वेसे रखवाली को रोज़ खिलाते हैं रोटियां।

बिसौली

नगर मे अभी पिछले दिनों एक कुत्ते ने सैकड़ों लोगों को घायल कर दिया था जो अभी तक इलाज कर रहे हैं उनमें कुछ लोग सरकारी अस्पतालों में इलाज कर रहे हैं तो कुछ प्राइवेट अस्पताल में काम कर रहे हैं कुछ लोग अपने काम को छोड़ बैठे औरअपने बच्चों का पालन नहीं  कर पा रहे । दो एक दिन  हो हल्लाह मचा जनता की आवाज उठी अधिकारियों को संज्ञान लेने के लिए लोगों ने कहां। खबर और खखवारों की सुर्खियां बनी सोशल मीडिया की जीना बनी लेकिन मामला वहीं के वहीं सबके रह गया हैआज भी अगर आप बाईपास के लालच में तहसील से बुध बाजार की तरफ निकालना चाहते हैं तो आपको एक दो नहीं बल्कि सैकड़ो कुत्तों का आवारा झूठ बैठा हुआ दिखाई देगाऔर कोई गारंटी नहीं है कि वह कब आप पर हमला कर देगा लोगों में डर का माहौल है क्योंकि यह आवारा कुत्तों का झुंड चलती हुई मोटरसाइकिलों पर दौड़ता है जिससे घबरा कर चालक संतुलन को देता है और कहीं ना कहीं नाले में या खंभे से टकरा के गिर जाता है रोजाना का यही हाल हैरोज कोई ना कोई घायल होता हैयह आवारा कुत्तों का झुंड बिना खाए पिए जीवित नहीं है बल्कि इन्हें बड़े प्यार से बुलाकर शाम को और सुबह को खाना दिया जाता है लोग घर की रखवाली के लिए दुकानों की अपनी-अपने घर की रखवाली के लिए इन्हें पहले हुए हैंवह अलग बात है कि कोई घटना होने के बाद या किसी को काटने के बाद कोई इनका मालिक नजर नहीं आताशासन प्रशासन को इन आवारा कुत्तों को पकड़ने की मुहिम चलानी पड़ेगी आखिर क्यों कान पर जू नहीं रंग रही क्या लोग इसी तरह घायल होते रहेंगेक्या अस्पतालों में रेबीज लगवाने के लिए लाइन में लगते रहेंगेवहां भी 10:00 के बाद नंबर आता है जो 12:00 बजे तक नहीं पढ़ पाता है यदि रेबीज लगवाने जाते हैं तो मजदूरी मार नहीं होती है इसलिए लोग प्राइवेट अस्पतालों की तरफ भी रोक कर लेते हैं जिम्मेदार अधिकारियों को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और एक मुहिम चलना चाहिए ताकि इन आवारा कुत्तों से स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को निजात मिल सके मोटरसाइकिल चलाने वाले लोगों को निजात मिल सके वही हमारे नगर के गणमान्य नेता गाना सिर्फ वोट मांगने तक जनता से सरोकार बनाए रखते हैं। क्या इन आवारा कुत्तों का और आवारा बंदरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा। क्या इस समस्या का कोई इलाज नहीं है ? लेकिन किसी नेता के किसी अधिकारी के किसी कर्मचारियों के बच्चों को नहीं काटा है।  वरना इनसे निजात की मुहिम शुरू हो चुकी होती।

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