बदायूं

उस्ताद शायर अहमद अमजदी के जन्म दिन के अवसर पर सजी कवि एवं शायरों की महफिल।

 

बदायूं – कारवांन ए अमजद अकादमी बदायूॅं उत्तर प्रदेश के तत्वावाधान में संस्था अध्यक्ष/संस्थापक अहमद अमजदी बदायूॅंनी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन
पी डब्लू डी गेस्ट हाउस कर्मचारी संघ ठेकेदार भवन डीएम रोड निकट रानी लक्ष्मीबाई चौराहा बदायूॅं में आयोजित किया गया जिस की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि शमशेर बहादुर आंचल, मुख्य अतिथि ध्रुव देव गुप्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा मंच संगठन, विशिष्ट अतिथि सर्वेश चन्द्र गुप्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री र्सव वैश्य गरिमा मंच, वा संचालन भूराज सिंह राजलांयर ने किया सर्वप्रथम कार्यक्रम संयोजक राजवीर सिंह तरंग ने सरस्वती वंदना व नाते पाक कासिम खैरवी साहब ने पड़ी अध्यक्षता कर रहे शमशेर बहादुर आंचल ने कहा
सैकड़ों र्ददमन्द होते हैं, काम के lलोग चंद होते हैं, जब मुसीबत की घड़ी आती है, सब के दरवाज़े बंद होते हैं,

अहमद अमजदी बदायूॅंनी ने कुछ यूॅं कहा
ग़मज़दा हो नहीं सकते कभी जज़बात से हम,
ख़ूब वाक़िफ़ हैं ज़माने तेरे हालात से हम,
आज ऐलान ये करते हैं सितमगर सुनले,
अब नहीं ड़रते ज़माने की किसी बात से हम,
सुरेंद्र नाज बदायूंनी ने कहा-
सब मंजर बदल के बैठ गया।
अब्र सूरज निकल के बैठ गया।
जो कोई राह में मिला मुझको,
दो कदम साथ चल के बैठ गया।

डाॅ. अरविन्द धवल ने आजकल के हालात पर तंज कहते हुए कहा-
उनकी हर इक शहर में कोठी जायज है,
बेघर जब घर लेगा हंगामा होगा।
जीते जी इक कौर नहीं देगा कोई,
भूखा जब मर लेगा हंगामा होगा।

सादिक अलापुरी ने कहा-
जब भी आते हैं वो गुलिस्तां में,
रंग फूलों के खुद निखरते हैं।

क़ासिम खैरवी ने फ़रमाया –
आंख जब आंसुओं से तर हो जाए,
फिर दुआ कैसे बेअसर हो जाए।

राजवीर सिंह ‘तरंग’ ने अहमद अमजदी की शान में कहा-
नेक दिल इंसान अहमद अमजदी।
शायरी की शान अहमद अमजदी।
झूठ को कहना हमेशा झूठ ही-
आपकी पहचान अहमद अमजदी।

शम्स मुजाहिदी ने कहा
अब तक तो मेरे गांव में अमनों अमान था,
किसने लड़ा दिया मियां पंडित पठान को

उज्ज्वल वशिष्ठ ने फ़रमाया
हों मुबारक जन्मदिन के पल आपको,
मेरे शब्दों के अर्पित कंवल आपको।

शैलेन्द्र मिश्रा ‘देव’ ने कुछ यूं कहा-
खास अपना मुकाम रखते हैं।
शायरी में वह नाम रखते हैं।
लोग कहते हैं अमजदी जिनको,
गीत गजलों का फाम रखते हैं।

अच्छन बाबू बदायुंनी ने कहा-
इंसानियत की राह से इंसान हट गया।
आपस की नफरतों से इंसान बॅंट गया।
मत रखो दिलों में ऐसी कदूरतें ऐ ‘अच्छन’-
आपस की फितरतों से हिंदुस्तान बॅंट गया।

सैय्यद अमान फर्रूखाबादी ने फ़रमाया –
मोहब्बतों की रियाज़ सुन लो,
हमारे दिल की आवाज सुन लो।
यह याद रखना मुखालिफों तुम,
है इश्क़ मेरा फ़राज़ सुन लो।

मुशायरे के अंत में आदरणीय ध्रुव देव गुप्ता जी की तरफ अहमद अमजदी बदायूॅंनी के जन्मदिन पर केक काट कर उनको सम्मानित किया और बदायूं का लाडला शायर/कवि उज्जवल वशिष्ठ ने भी शाल ओढ़ाकर बर्थडे गिफ्ट दिया वह उन कभी शायरों ने भी फूल वालों विभिन्न गिफ्टों से नवाजा जिससे वह काफी खुश नजर आए और उन्होंने सभी का धन्यवाद शुक्रिया अदा किया विशेष कर आदरणीय शमशेर बहादुर आंचल जी ने अहमद अमजदी बदायूॅंनी को अपनी दुआओं से नवाजा और अपना आशीर्वाद दिया
मुशायरे के मुख्य अतिथि ध्रुव देव गुप्ता जी ने कहा कि आज हम सब को अपने व्यक्तिगत मनमुटाव को बुलाकर हिंदी और उर्दू साहित्य के लिए काम करना चाहिए ताकि आने वाली नस्ल इन हमारे हिंदुस्तानी भाषण को जीवित रख सके और बदायूं दिन रत्नाकारों की बिना पर जाना जाता है उनकी परंपरा जीवित रहे इसके लिए मेरा एक सुझाव है इस तरह के कार्यक्रम बिना किसी भेदभाव के होते रहने चाहिए और हमारी जिम्मेदारी है कि हम सब इस तरह के कार्यक्रम में सहयोग करें उन्होंने एक बात और कहीं मैं चाहता हूं की बदायूं के रचनाकारों की एक पुस्तक वह चाहे 100 प्रश्न 200 300 500 1000 प्रश्न की गुना हो वह छपाई जाए और हिंदुस्तान की तमाम लाइब्रेरी में पहुंचाया जाए उसके लिए जो खर्चा आएगा उसको हम अपनी जेब से खर्च करेंगे इस बात को सुनते ही मुशायरा के वशिष्ठ अतिथि आदरणीय सर्वेश चंद्रगुप्त की ने भी ऐलान किया कि फिलहाल में इस कार्य के लिए अपनी ओर से₹5000 देने का ऐलान करता हूं इस प्रस्ताव को मौजूदा कवि/ शायरों ने अपनी सहमति जताई और दुर्गा देव जी सर्वेश चंद्र गुप्ता जी का धन्यवाद किया इसकी जिम्मेदारी अहमद अमजदी ने बदायूं के गजलकर श्री सुरेंद्र कुमार नाज को सौंपीं इस का भी सभी ने समर्थन किया अंत में मुशायरा के आगे जग और संयोजक और संस्था के राष्ट्रीय सचिव राजवीर सिंह तरंग ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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