बदायूं
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आशा वर्कर्स यूनियन ने मनाया ब्लैक डे।

बदायूँ। आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर जारी हड़ताल के 33 वे दिन आज पूरे प्रदेश में सरकार के दमनकारी रवैए और वार्ता पीछे हटकर की गई। वादाखिलाफी के विरुद्ध ब्लैक डे ( काला दिवस ) बदायूं में भी मनाया गया। आज पूरे जिले के सामुदायिक केंद्रों पर आशा कर्मियों ने काले वस्त्र या पट्टे पहनकर अपना आक्रोश व्यक्त किया ।
मालवीय विद्यालय मैदान ने 33 वे दिन भी हड़ताली आशा कर्मियों का धरना जारी रहा।
धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष जौली वैश्य ने खास कि आज प्रदेश में हजारों आशा कर्मी काला दिवस मना रही हैं। इससे ज्यादा किसी सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति नहीं हो सकती । सरकार को अब भी समझ आ जानी चाहिए। वार्ता के दरवाजे बंद कर सरकार ने अपने अहंकार और जनविरोधी चेहरे को ही उजागर किया है।
उन्होंने कहा कि इन 33 दिनों में हर दिन सरकार के दोहरे चेहरे और उसके खुद के कथनों का दोहरापन साफ होता गया है। आशा कर्मियों को स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी कहने वाले मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कहां हैं? उनकी ही सरकारों में पूरी सर्दी में आशा कर्मी अपनी आवाज उठाती रही पर सरकार ने उनकी आवाज को सुनकर भी अनसुना कर दिया।
जौली वैश्य ने कहा कि 19 और 20 जनवरी को जन अदालतें लगाई जाएगी और जनता की अदालत में सरकार के खिलाफ आशा कर्मी अपनी फरियाद पेश करेगी। सरकार इस आंदोलन को चुप्पी साधकर थका नहीं सकती और न ही दमन के बल पर डरा सकती है।
उन्होंने 19 जनवरी को सामाजिक कार्यकर्ता , पत्रकार, बुद्धिजीवी ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं सहित आशा कर्मियों के परिजनों का मालवीय मैदान में आकर जन अदालत को सफल बनाने का आह्वान किया।
आज मनीषा सोमश्री ,गीता देवी , नीरज देवी , प्रतिभा , इंदुवती , सरोज पाठक , कमलेश , अनुपम , हंसमुखी , शारदा देवी , रजनी , रामवती , मिथलेश , मुन्नी , राधेश्वरी , मंजू , सीता रानी ने भी अपने विचार रखे ।

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