अवैध कब्जों के खिलाफ 12वें दिन भी धरना जारी मंडल स्तर पर आंदोलन की चेतावनी भाकियू (चढूनी)
बिसौली से शिशुपाल सागर की रिपोर्ट

अवैध कब्जों के खिलाफ 12वें दिन भी धरना जारी मंडल स्तर पर आंदोलन की चेतावनी भाकियू (चढूनी)
बदायूँ। 20 अक्टूबर । जनपद में कथित अवैध कब्जों और जनसमस्याओं के समाधान की मांग को लेकर मालवीय आवास गृह पर भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) का अनिश्चितकालीन धरना 12वें दिन भी जारी रहा। धरनारत किसान नेताओं ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच और शीघ्र कार्रवाई की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को बरेली मंडल में विस्तारित किया जाएगा।
धरनारत लोगों के अनुसार, पहला मामला बदायूँ तहसील की ग्राम पंचायत बुटला दौलत के मजरा जनुइया से संबंधित है। आरोप है कि प्रेमवती और भगवान दास ने रामदुलार आदि से जमीन खरीदने का सौदा किया था, जिसके लिए इकरारनामा भी कराया गया था। निर्धारित समय में बैनामा नहीं होने पर संबंधित पक्ष द्वारा न्यायालय में वाद दायर किया गया। इसी बीच उक्त जमीन का बैनामा गजराज के नाम किए जाने से विवाद उत्पन्न हो गया। धरनारत लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित समाधान कराने की मांग की है।
वहीं दूसरा मामला बदायूँ शहर में बीएसएनएल कार्यालय के पीछे स्थित अब्बासी कॉलोनी से नई सराय के बड़े गेट तक जाने वाले नाले और आम रास्ते से जुड़ा है। धरनारत लोगों का आरोप है कि डॉ. शरीक जनाब द्वारा नाले की बाउंड्री पर करीब आठ फीट ऊंची और लगभग 100 फीट लंबी दीवार बनाई गई है। इसके अलावा मौके पर 10 से 12 भारी बीम भी खड़े किए गए हैं।
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) गुट संगठन का कहना है कि कथित निर्माण से आम रास्ता बाधित हो रहा है और नाले की सफाई में भी परेशानी आ रही है। आरोप है कि नाले की सफाई तथा मशीनों के आवागमन के लिए छोड़ी गई सरकारी भूमि पर भी कब्जा किया गया है, जहां मेडिकल का संचालन किया जा रहा है। धरनारत लोगों के अनुसार, रास्ता बाधित होने और जल निकासी प्रभावित होने से स्थानीय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे जलभराव और बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में दोनों मामलों में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। धरनारत लोगों का आरोप है कि धरना शुरू होने के बाद भी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बावजूद कथित निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ और समस्या जस की तस बनी हुई है।
संगठन ने मांग की है कि जनुइया गांव के जमीन विवाद की निष्पक्ष जांच कराई जाए। वहीं, शहर में नाले और आम रास्ते से संबंधित मामले में सरकारी भूमि की पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। जांच में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए। साथ ही नाले की सफाई व्यवस्था बहाल कर आम रास्ते को सुचारु कराया जाए। बरेली मंडल में आंदोलन की चेतावनी भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने स्पष्ट किया है कि यदि दोनों मामलों में शीघ्र कार्रवाई कर समस्याओं का समाधान नहीं कराया गया तो संगठन बरेली मंडलायुक्त कार्यालय पर आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा। धरनारत लोगों ने कहा कि जनसमस्याओं का समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और आंदोलन के विस्तार की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
वहीं फिलहाल, दोनों मामलों में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है।
वही इस अवसर पर जुबैर, बीयीशुदास, यादवेंद्र सिंह उर्फ (पप्पू) शरिफ अब्बासी, भगवान दास, नूरुद्दीन, दिलशाद, प्रेमवती, सहित दर्जन भर लोग उपस्थित रहे।




