
बिसौली
राजस्थान के अजमेर में स्थित महान सूफी संत हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के सालाना उर्स मुबारक छटी शरीफ के मौक़े पर एक बहुत बड़े उर्स का आयोजन सदियों से होता आया हैं जहाँ दुनिया के कोने कोने से उनके चाहने वाले सभी धर्मों के लोग अपनी अक़ीदत मुहब्बत के साथ हाज़िर होकर सर नवाते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो किसी मजबूरी वश नहीं पहुंच पाते। वे अपने अपने घरों से उनकी नियाज़ फातिहा का इंतजाम करते हैं। इसी कड़ी में बदायूं के बिसौली में भी कई बरसों से ख्वाजा गरीब नवाज़ के चाहने वाले सामूहिक रूप से उनके उर्स को मनाते हैं। और ये कार्यक्रम दो तीन दिन तक लगातार चलता है। नगर कल सुबह से ही क़ुरआन ख्वआनि मिलाद नियाज कव्वालियों का सिलसिला शुरू हो गया नगर के मुस्लिम इलाकों में जबरदस्त सजावट रही। रात को चादर शरीफ का जुलूस निकला और आज सवेरे से ही लंगर की तय्यरिया शुरू हो गयीं। दोपहर एक बजे से फातिहा के बाद लंगर शुरू हो गये दर्जनों कमेटियों ने लंगर दारी की देख कर लग रहा था कि जैसे ख्वाजा के नाम पर लंगर करने की जैसे होड़ लगी है। युवाओं का जोश और अक़ीदत देखते बन रहा था। ऐसा मंजर महसूस हो रहा था जैसे हम सच में ही ख्वाजा गरीब नवाज़ की गलियों में खड़े हों। तभी ये शेर ज़हन में गूंज उठा।
उनके जो ग़ुलाम हो गये वक्त के इमाम हो गये।
पास वाले देखते रहे दूर से सलाम हो गये।




