दशहरा के पावन पर्व के अवसर पर घरों में हुआ पूजन
बबराला से अनिरुद्ध भारद्वाज की रिपोर्ट

बबराला दशहरा पर्व पर घरों में पूजन हुआ।इस दिन को आयुध पूजा के नाम से भी जाना जाता है।घरों में लोगों ने पूजन किया।
नगर के छोटे मन्दिर में पण्डित ब्रजेश शास्त्री ने बताया कि इस त्योहार को लेकर हिंदू धर्म ग्रंथों में कई कथाएं वर्णित हैं।इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। वहीं एक अन्य मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का अंत किया था। यह पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। दशहरा का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है। लेकिन इस दिन के शाम के समय को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। दशहरा के शाम के समय को विजय काल कहा जाता है। विजयकाल को सफलता का समय माना गया है। विजय काल में कार्यों को करने विजय प्राप्त होती है। दशहरा के दिन किसी भी नए काम की शुरुआत व खरीदारी करना अत्यंत शुभ माना गया है।इस दौरान नीरज वार्ष्णेय, रश्मि,लवी, संस्कृति वार्ष्णेय,अंजू,कामिनी,सलोनी,शिवानी वार्ष्णेय आदि रहीं।
अनिरुद्ध भारद्वाज बबराला सम्भल



