संभल
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मौलाना सुलैमान अशरफ हामिदी* *की दीनी व सामाजिक खिदमात को किया गया याद! 

सम्भल से लल्ला सलमानी की रिपोर्ट

 

 

 

 

सम्भल जिला के पूर्व शाही इमाम ईदगाह सम्भल हज़रत मौलाना सुलेमान अशरफ हामिदी रहमतुल्लाह अलैह का दूसरा सालाना उर्स-ए-मोहसिने मिल्लत अकीदत व एहतराम के साथ आयोजित किया गया। उर्स की महफिल में सम्भल सहित आसपास के जनपदों से बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम, मशाइख, सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियों और अकीदतमंदों ने शिरकत कर मरहूम की दीनी, इल्मी, सामाजिक एवं काइदाना खिदमात को खिराज-ए- अकीदत पेश किया।

कार्यक्रम की सरपरस्ती विश्व प्रसिद्ध खानकाह बिलग्राम शरीफ के सज्जादानशीन रईसुल अतक़िया आले रसूल हज़रत सय्यद उवैस मुस्तफा साहब वास्ती ने फरमाई, जबकि सदारत हज़रत सय्यद यज़दानी मियां ने की। कार्यक्रम का आगाज़ कारी बदरे आलम निज़ामी की तिलावते कलाम-ए-पाक से हुआ। इसके बाद गुलाम ग़ौस ग़ज़ाली और इमरान जाफर बरकाती ने बारगाह-ए-रिसालत (सल्लाहो अलै वसल्लम) ﷺ में नात-ए-पाक का नजराना पेश कर हाज़िरीन को महज़ूज़ किया।इस अवसर पर मौलाना तालिब मिसबाही और मौलाना असनाद रज़ा ने मोहसिने मिल्लत हज़रत मौलाना सुलैमान अशरफ हामिदीؒ की हयात, दीनी व इल्मी खिदमात तथा उनकी काइदाना सलाहियतों पर विस्तार से रोशनी डाली। वक्ताओं ने कहा कि मौलाना सुलैमान अशरफ हामिदी ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा दीन की खिदमत, मिल्लत की रहनुमाई और समाज की इस्लाह के लिए वक्फ किया। उनकी बेबाकी, सूझबूझ और काइदाना सलाहियतों ने सम्भल की सामाजिक व मज़हबी जिंदगी पर गहरा असर छोड़ा।मुख्य वक्ता मौलाना सैफुल्ला अलीमी, कलकत्ता ने अपने खिताब में समाज में तेजी से फैल रही बुराइयों पर तश्वीश का इज़हार करते हुए मुसलमानों से शरीयत की पाबंदी और इस्लामी तालीमात पर अमल करने की अपील की। उन्होंने खास तौर पर शादी-ब्याह में होने वाली फुज़ूलखर्ची से बचने और सादगी को अपनाने की ताकीद की। उन्होंने कहा कि समाज की इस्लाह केवल तकरीरों से नहीं बल्कि अमली जिंदगी में दीन की तालीमात को अपनाने से होगी।

उर्स की महफिल में कुल शरीफ और सलातो-सलाम पेश किया गया। आखिर में हज़रत सय्यद उवैस मुस्तफा वास्ती, सज्जादानशीन बिलग्राम शरीफ ने मुल्क व मिल्लत की सलामती, अमनो -अमान, इत्तेहाद व भाईचारे तथा हज़रत मौलाना सुलैमान अशरफ हामिदीؒ की मगफिरत और बुलंदी-ए-दरजात के लिए दुआ कराई।

उर्स में सम्भल के अलावा आसपास के जिलों से आए मज़हबी, सामाजिक एवं राजनीतिक लोगों ने भी शिरकत की। महफिल में मरहूम मौलाना की दीनी व सामाजिक सेवाओं को याद करते हुए उनकी इल्मी व इस्लाही विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के अंत में मौलाना फैज़ान अशरफ हामिदी एवं कारी ग़ाजी अशरफ हामिदी ने उर्स में शिरकत करने वाले तमाम उलमा- ए- किराम, मशाइख, मेहमानों, सामाजिक व राजनीतिक हस्तियों और अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा किया।

उर्स के तमाम इंतिज़ामात को कामयाब बनाने में सय्यद कलीम अशरफ, मुगीस अशरफ, सय्यद रिजवानी मियां, सय्यद रेहानी, हस्नैन अशरफ,मुबीन अशरफ,फाइक़ अशरफ हामिदी एवं तमीम अशरफ हामिदी ने अहम भूमिका निभाई। आखिर में तबर्रुक का तखसिम व बाहर से आऐ उलामाऐ किराम के खाने का भी एहतेमाम किया गया

इस मौके पर

काइदे अहले सुन्नत मौलाना नफीस अखतर अशरफी, मुफ्ती रिजवानुल हक अमरोहा,मुफती दानिश अली मुरादाबाद, मौलाना कारी अय्यूब लखनऊ, मुफ्ती अब्दुल माजिद रामपुर ,मौलाना रियासत अली कादरी बदायू,मौलाना हबीबुर्रहमान बिलारी, कारी इल्यास बरकाती दिल्ली,

कारी आस मौहम्मद नगल,मुफ्ती वकार अहमद हसनपुर, मौलाना जिया उर रहमान बरेली शरीफ, मुफ्ती रईसुद्दीन नूरी पीलीभीत,मौलाना अरकान अजहरी जोया,मौलाना असनाद रज़ा जोया, मौलाना गुलाम नबी कलियर शरीफ, मौलाना तालिब हुसैन मिसबाही, मौलाना जिया उल मुस्तफा अशरफी, मौलाना आफताब आलम अमरोहा,मुफ्ती नसीम सकाफी,मौलाना फाजिलमिसबाही,

मौलाना कारी इरफान लतीफी,मौलाना मुफ्ती इमरान रज़ा, मौलाना नफीस अशफाकी, मौलाना कामिल मिसबाही, मौलाना राहत अज़ीज़ी, मौलाना मोहम्मद अली मिसबाही, मौलाना हारून अशफाकी, मौलाना आलमगीर मिसबाही,मुफ्ती कासिम मन्नानी मुरादाबाद, मौलाना तालिब रजा, मौलाना आमिल खॉं, मौलाना आरिफ़ अशफाकी, मौलाना रिफाउल हसन, कारी अब्दुल वाजिद, कारी मुहम्मद आशकार जौधपुरी, कारी अरमान रज़ा हसनपुर, कारी अब्दुल मुईद अलीगढ, कारी मुहम्मद फुरकान नजीबाबाद,मौलाना तारिक आफाकी गजरौला,मौलाना फहीम रजवी काशी पुर, मौलाना मन्नान रजा रुद्रपुर,मौलाना गुलाम मुस्तफा रामनगर के अलावा शहर व आसपास के इलाकों के धार्मिक,सामाजिक, व्यापारिक एवं राजनीतिक लोंगों ने बडी तादाद में शिरकत की ।

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