नाले पर अवैध दीवार और जमीन धोखाधड़ी को लेकर 17 दिनों से डटे किसान, जिला प्रशासन मौन।
बिसौली से शिशुपाल सागर की रिपोर्ट

बदायूँ। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के बैनर तले मालवीय आवास गृह पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना रविवार को 17वें दिन भी जारी रहा। किसान संगठन जिले के दो अलग-अलग गंभीर मामलों को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
पहला मामला: नाले पर अवैध निर्माण से बस्ती का रास्ता बंद
पहला मामला शहर के बीएसएनएल (BSNL) ऑफिस के पीछे का है, जहाँ डॉ. शारिक जनाब की कोठी से गुजरने वाले नाले पर 100 फीट लंबी अवैध दीवार खड़ी कर दी गई है। धरने की अध्यक्षता कर रहे भाकियू (चढ़ूनी) के जिलाध्यक्ष सतीश साहू ने बताया कि नाले पर अवैध कब्जे के कारण पूरी बस्ती का आवागमन ठप्प हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरा मामला: जमीन सौदे में धोखाधड़ी और अपात्र के नाम रजिस्ट्री संगठन मंत्री रशीद अब्बासी ने दूसरा मामला उजागर करते हुए बताया कि मामला बदायूं तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत बुटला दौलत (मजरा जैनुइया काछ) से जुड़ा है। यहां प्रेमवती और भगवान दास ने रामदुलार व अन्य से जमीन का सौदा तय किया था। आरोप है कि तय समय पर पीड़ित पक्ष के नाम बैनामा (रजिस्ट्री) करने के बजाय, संबंधित पक्ष ने छल-कपट कर जमीन किसी अन्य व्यक्ति (गजराज) के नाम दर्ज करा दी। किसानों ने तीखा सवाल उठाया है कि इस खुली धोखाधड़ी के बावजूद जिला प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय पर्दा क्यों डाल रहा है?
प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा रोष, उग्र आंदोलन की चेतावनी
जिलाध्यक्ष सतीश साहू ने कहा कि दोनों ही गंभीर प्रकरणों में बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन और सूचना देने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। 17 दिन बीत जाने के बाद भी न तो अवैध निर्माण हटाया गया और न ही धोखाधड़ी के पीड़ितों को न्याय मिला।
किसान नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक नाले से अवैध दीवार हटाकर रास्ता बहाल नहीं किया जाता और जमीन धोखाधड़ी मामले में दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो किसान उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
धरने में ये लोग रहे मौजूद
धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से दिलशाद अब्बासी, रशीद, शरीफ, जुबेर, बिशु दास, भगवान दास, हाफिज, प्रेमवती और सलीम सहित कई कार्यकर्ता व पीड़ित किसान उपस्थित रहे।

