फार्मासिस्ट की लापरवाही पर महानिदेशक ने दिए निलंबन एवं अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश!
सम्भल से लल्ला सलमानी की रिपोर्ट
सम्भल जिला के
जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल के निर्देशानुसार आज संयुक्त जिला चिकित्सालय, सम्भल में उपचार के दौरान सामने आए लापरवाही के प्रकरण की कराई गई जांच के आधार पर महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश द्वारा संबंधित फार्मासिस्ट के विरुद्ध निलंबन एवं अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
प्रकरण दिनांक 21 सितम्बर 2026 का है, जब ग्राम मूसापुर निवासी लगभग 04 वर्षीय बालक अदीब को उसके परिजन उपचार के लिए संयुक्त जिला चिकित्सालय, सम्भल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे थे। प्रकरण में बालक को कथित रूप से सर्पदंश की आशंका बताई गई थी। उपलब्ध अभिलेखों, संबंधित कर्मचारियों एवं परिजनों के बयानों की जांच में उपचार एवं चिकित्सकीय पर्यवेक्षण की प्रक्रिया में लापरवाही के तथ्य सामने आए।
जांच में पाया गया कि बालक का इमरजेंसी ओपीडी रजिस्टर में पंजीकरण किया गया तथा उसके नाम से पर्चा संख्या 197927 जारी हुआ, लेकिन पर्चे पर किसी चिकित्सक के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फार्मासिस्ट मनोज कुमार सिंह द्वारा बालक को अपने स्तर से दवा/इंजेक्शन दिए जाने तथा उसे एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) के लिए भेजे जाने की बात सामने आई। बालक को तत्काल चिकित्सकीय पर्यवेक्षण में रखने एवं संबंधित चिकित्सक से परीक्षण कराने की प्रक्रिया का समुचित अनुपालन नहीं किया गया।प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण पाठक द्वारा संयुक्त रूप से जांच की गई। जांच में उपलब्ध अभिलेखों, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के बयानों एवं परिजनों के कथनों का परीक्षण किया गया।संयुक्त जांच आख्या के आधार पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश को प्रकरण से अवगत कराया गया। इसके आधार पर महानिदेशक द्वारा आज 29 सितम्बर को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, संयुक्त जिला चिकित्सालय, सम्भल को पत्र जारी कर फार्मासिस्ट मनोज कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनिक कार्रवाई संस्थित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
महानिदेशक द्वारा अपने पत्र में उत्तर प्रदेश भेषजिक (फार्मासिस्ट) सेवा नियमावली, 1980 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया गया है कि उक्त नियमावली के अंतर्गत जनपद स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी/मुख्य चिकित्सा अधीक्षक/अधीक्षिका नियुक्ति प्राधिकारी होते हैं। साथ ही आरोप पत्र गठित कर संबंधित सक्षम अधिकारी को उपलब्ध कराने तथा की गई कार्रवाई से शासन/महानिदेशालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा मरीजों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं नियमानुसार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
