संभल
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बाल विवाह रोकने को लेकर डी एम के सख्त संदेश।

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जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बाल विवाह रोकने को लेकर सख्त संदेश देते हुए कहा कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत यह एक गंभीर अपराध है और इसे रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह के खिलाफ चलाया जा रहा यह अभियान जन-जागरूकता पर आधारित है, ताकि समय रहते बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि कोई माता-पिता बाल विवाह कराते हैं या कोई व्यक्ति इसमें किसी भी रूप में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें न केवल विवाह कराने वाले माता-पिता, बल्कि शादी में सहयोग करने वाले नाई, हलवाई, टेंट वाले, बैंड वाले या अन्य कोई भी व्यक्ति शामिल हैं। ऐसे सभी दोषियों के लिए कानून में दो साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए घातक है। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि समाज के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। प्रशासन का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि समय रहते बाल विवाह को रोककर बच्चों का जीवन बचाना है। जिलाधिकारी ने सम्भलवासियों से अपील की कि यदि कहीं भी किसी प्रकार का बाल विवाह होने की जानकारी मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें। सूचना देने के लिए नागरिक पुलिस हेल्पलाइन 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और GRC हेल्पलाइन नंबर 18001027222 पर संपर्क कर सकते हैं। डीएम ने कहा कि आपकी एक सूचना किसी बच्चे का भविष्य संवार सकती है। बाल विवाह को रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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