राजकीय मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने जाना पंचकर्म का प्रायोगिक स्वरूप, डॉ. सुविज्ञ पाठक ने दिया चरक संहिता का व्यावहारिक प्रशिक्षण
आसफपुर से दानवीर सिंह की रिपोर्ट
बदायूं- आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक की चिकित्सा पद्धति को व्यावहारिक रूप से समझाने हेतु शनिवार को माल गोदाम रोड, सिविल लाइन्स स्थित चरक आयुर्वेद एवं पंचकर्म चिकित्सालय में राजकीय मेडिकल कॉलेज के फार्मेसी विभाग के छात्र-छात्राओं का एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजंन किया गया।
इस भ्रमण में फार्मेसी विभाग के अंतिम वर्ष के लगभग साठ छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। चिकित्सालय के निदेशक एवं वरिष्ठ पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. सुविज्ञ पाठक ने छात्रों को चरक संहिता में वर्णित पंचकर्म चिकित्सा का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया।
डॉ. पाठक ने कहा, चरक संहिता केवल सिद्धांतों का संकलन नहीं, बल्कि रोगी के संपूर्ण उपचार का विज्ञान है। बस्ती,वमन, विरेचन, नस्य और रक्तमोक्षण जैसी पंचकर्म प्रक्रियाएं शरीर के विकृत दोषों को बाहर निकालकर रोग को जड़ से समाप्त करती हैं। आधुनिक जीवनशैली जनित रोगों में इनकी उपयोगिता आज और अधिक बढ़ गई है।”
प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को बस्ती कर्म की संपूर्ण विधि, उपयुक्त औषधियों का चयन, मात्रा निर्धारण, पथ्य-अपथ्य तथा बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया गया। छात्रों ने चिकित्सालय के पंचकर्म कक्ष, शिरोधारा कक्ष, औषधि निर्माण इकाई एवं स्वर्ण-प्राशन संस्कार कक्ष का अवलोकन कर प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा।
कॉलेज की छात्रा प्रिया शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, कॉलेज में हमने चरक के सिद्धांत पढ़े थे, लेकिन यहां प्रत्यक्ष देखकर और डॉ. पाठक सर से सरल भाषा में समझकर अब विषय अधिक स्पष्ट हो गया है।”
डॉ. सुविज्ञ पाठक ने बताया कि आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार एवं छात्रों के कौशल विकास हेतु उनका चिकित्सालय भविष्य में भी इंटर्नशिप तथा प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।



