
संपादकीय
शिक्षक दिवस: हर सीख देने वाला हमारा उस्ताद ही है क्योंकि
इंसान जब इस दुनिया में आता है, तो उसके पास न कोई भाषा होती है, न कोई अनुभव तजुर्बा और न ही यह समझ कि दुनिया कैसे चलती है।
वह एक-एक कदम पर किसी न किसी से कुछ सीखता है।
सबसे पहले माँ उसे बोलना, प्यार करना और रिश्तों की गर्माहट सिखाती है।
पिता उसे जिम्मेदारी, हिम्मत और संघर्ष का अर्थ समझाते हैं।
भाई-बहन उसे साथ निभाना सिखाते हैं।
स्कूल के शिक्षक उसे किताबों का ज्ञान देते हैं।
दोस्त उसे रिश्तों की अहमियत बताते हैं।
और फिर ज़िंदगी में मिलने वाला हर इंसान अपने अनुभव से हमें कुछ न कुछ सिखाकर जाता है।
कभी कोई हमें ज्ञान देकर उस्ताद बनता है,
कभी कोई अपनी गलती से सबक देकर,
कभी कोई अपनी कामयाबी से प्रेरणा देकर,
तो कभी कोई अपनी नाकामी से ज़िंदगी की हक़ीक़त समझाकर।
इसलिए उस्ताद की कोई एक शक्ल नहीं होती।
जिससे हमने कुछ सीखा, जिसने हमें बेहतर इंसान बनाया—वह हमारे लिए उस्ताद है।
हमारी ज़िंदगी में ऐसे न जाने कितने लोग होते हैं, जिनका नाम शायद हम कभी शिक्षक दिवस पर नहीं लेते, लेकिन हमारी शख्सियत में उनकी दी हुई सीख आज भी ज़िंदा होती है।
आज शिक्षक दिवस पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात उस्तादों को सलाम,
जिन्होंने हमें सिर्फ़ पढ़ाया नहीं, बल्कि हमें “इंसान” बनना सिखाया।
❤️ हर उस शख़्स को सलाम, जिससे हमने कुछ सीखा।
शिक्षक दिवस की दिली मुबारकबाद एवं शुभकामनाएँ। 🌹
संपादक