मोहम्मद हसन के नाज़िरा कुरआन मुकम्मल करने पर फैसल अज़ीज़ एडवोकेट को मुबारकबाद!
सम्भल से लल्ला सलमानी की रिपोर्ट

संभल जिला के सम्भल निवासी जनाब फैसल अज़ीज़ एडवोकेट के बेटे मोहम्मद हसन ने कुरआन-ए-करीम की नाज़िरा तालीम पूरी करने की सआदत हासिल की है। इस खुशी के मौके पर मौलाना मोहम्मद तंजीम कासमी संभली ने फैसल अज़ीज़ एडवोकेट और उनके पूरे परिवार को दिली मुबारकबाद पेश की और मोहम्मद हसन के उज्ज्वल भविष्य, दीनी व अख़लाक़ी तरक्की एवं कुरआन-ए-करीम से गहरी मोहब्बत के लिए नेक ख्वाहिशात का इज़हार किया।अपने मुबारकबादी पैगाम में मौलाना मोहम्मद तंजीम कासमी संभली ने कहा कि कुरआन ए करीम अल्लाह पाक की बहुत बड़ी नेमत और इंसानियत के लिए हिदायत की किताब है। इसकी तालीम हासिल करना, इसकी तिलावत करना और इसकी तालीमात पर अमल करना दुनिया व आखिरत की कामयाबी का जरिया है। कुरआन-ए-करीम की नाज़िरा तालीम मुकम्मल करना एक अहम दीनी सआदत है, जो बच्चे के दिल में अल्लाह के कलाम की मोहब्बत पैदा करती है और उसकी जिंदगी को हिदायत की रोशनी से रोशन करने की बुनियाद बनती है।उन्होंने कहा कि नबी-ए-करीम ﷺ का इरशाद है, ”तुममें सबसे बेहतर वह है जो कुरआन सीखे और दूसरों को सिखाए।” इस हदीस से कुरआन की तालीम और उसे दूसरों तक पहुंचाने की अहमियत का अंदाजा होता है। बच्चों को कुरआन की तालीम से आरास्ता करना वालिदैन के लिए खुशी और सवाब का बड़ा जरिया है।मौलाना तंजीम कासमी संभली ने कहा कि कुरआन -ए-करीम की नाज़िरा तकमील सिर्फ एक तालीमी मरहला नहीं, बल्कि कुरआन से मोहब्बत, उसकी तिलावत और उसकी तालीमात पर अमल करने के एक मुबारक सफर की शुरुआत है। बच्चों को कुरआन पढ़ाने के साथ-साथ उसके मानी और मतलब समझने तथा उसकी तालीमात पर अमल करने की भी तरगीब देनी चाहिए, ताकि वे आगे चलकर दीन व मिल्लत के लिए फायदेमंद और नेक इंसान बन सकें।इस मुबारक मौके पर उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला मोहम्मद हसन को कुरआन-ए-करीम का सच्चा आशिक, हाफिज़-ए-कुरआन और अमल करने वाला बनाए। कुरआन को उसके सीने का नूर, दिल का सुकून, जिंदगी का रहनुमा और आखिरत में निजात का जरिया बनाए। उसे कुरआन की तालीमात पर अमल करने और उसकी रोशनी में अपनी जिंदगी संवारने की तौफीक अता फरमाए। उन्होंने फैसल अज़ीज़ एडवोकेट और उनके परिवार के लिए भी दुआ की कि अल्लाह तआला उन्हें इस दीनी सआदत पर बेहतरीन अज्र अता फरमाए, उनकी औलाद को नेक, सालेह और फरमांबरदार बनाए तथा उन्हें वालिदैन की आंखों की ठंडक और उनके लिए सदक़ा -ए-जारीया बनाये।
(सम्भल से लल्ला सलमानी की रिपोर्ट)
