बिल्सी(बदायूं)

ब्लाक अंबियापुर के गांव सूरजपुर गौशाला में बदहाली का आलम, जिंदा मवेशियों के जख्मो में रेंग रहे कीड़े।

बिल्सी से आर के आर्या की रिपोर्ट

 

 

बदायूं / बिल्सी – उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गौवंश के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावों की जमीनी हकीकत विकासखंड अंबियापुर के ग्राम सूरजपुर में तार-तार होती नजर आ रही है। कुछ दिनों पूर्व यहाँ से मृत पशुओं का वीडियो वायरल होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं टूटी है। शनिवार को जब गौ सेवा समिति की टीम ने गौशाला का औचक निरीक्षण किया, तो वहाँ के हालात रूह कँपा देने वाले मिले।

 

निरीक्षण में सामने आई खौफनाक तस्वीर

गौ सेवा समिति के सदस्य टिंकू गुप्ता के नेतृत्व में पहुँची टीम ने देखा कि गौशाला में पशु अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं:

 

गंभीर चोटें: कई पशुओं की आँखों से खून बह रहा था, तो कुछ के पेट पर गहरे घाव थे जिनमें कीड़े (कीट) रेंगते पाए गए।

 

लावारिस कंकाल: गौशाला के समीप ही एक पशु का केवल कंकाल अवशेष मिला, जिसे देखकर प्रतीत होता है कि मृत पशु को सम्मानजनक विदाई देने के बजाय उसे खुले में छोड़ दिया गया, जिसे हिंसक पशु-पक्षियों ने नोच खाया।

 

एक्सपायरी दवाइयां: गौशाला में उपचार के संसाधनों का अभाव तो था ही, साथ ही मौके पर मिलीं कुछ दवाइयां भी अपनी समय सीमा (एक्सपायर) पार कर चुकी थीं।

 

गौ भक्तों में भारी रोष

निरीक्षण के दौरान गौ सेवा टीम ने घायल पशुओं का प्राथमिक उपचार कराया, लेकिन स्थानीय प्रशासन की उदासीनता पर कड़े सवाल उठाए। टीम के सदस्यों का कहना है कि करोड़ों का बजट आखिर जा कहाँ रहा है? मृत गौवंश को विधि-विधान से दफनाने के बजाय उनके शवों के साथ ऐसी बेअदबी सरकार की मंशा पर पानी फेर रही है।

 

“यदि शासन-प्रशासन के उच्च अधिकारी स्वयं इन गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करें, तभी इनकी दशा सुधर सकती है। केवल कागजों पर खानापूर्ति से गौवंश की रक्षा नहीं होगी।”

— राम कृष्ण आर्य (बॉबी आर्य )

 

टीम ने लिया संकल्प

इस मौके पर कृष्ण बासनी, अमन बासनी और गुधनी की टीम प्रमुख रूप से मौजूद रही। गौ सेवा समिति ने स्पष्ट किया कि यह निरीक्षण केवल सूरजपुर तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में क्षेत्र की अन्य गौशालाओं की भी इसी तरह जांच की जाएगी ताकि मूक पशुओं को उनका अधिकार और उचित उपचार मिल सके।

 

अब देखना यह है कि इस वायरल वीडियो और सामाजिक संगठनों की सक्रियता के बाद क्या जिला प्रशासन दोषी कर्मचारियों और जिम्मेदारों पर कोई कठोर कार्रवाई करता है या नहीं।

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