दिल्ली में जंतर मंतर पर चल रहे छात्रों नौजवानों के पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन की मांगों के समर्थन एवं दिल्ली में संसद मार्च हुए निर्मम दमन के विरोध में दिया गया में सौंपा ज्ञापन
बिसौली से शिशुपाल सागर की रिपोर्ट
बदायूं -जनहित सत्याग्रह मोर्चा एवं आशा कर्मचारी यूनियन ने मालवीय आवास गृह पर इकट्ठा होकर एवं कलेक्ट्रेट जाकर द्वारा अलग अलग ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार को बदायूं डीएम के माध्यम से भेजा गया।
ज्ञापन दिल्ली में जंतर मंतर पर चल रहे छात्रों नौजवानों के पेपर लीक के खिलाफ चल रहे आंदोलन की मांगों के समर्थन एवं दिल्ली में संसद मार्च हुए निर्मम दमन के विरोध में दिया गया।
मोर्चा के अध्यक्ष प्रेमपाल सिंह ने कहा कि बार – बार पेपर लीक होने से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है।आज जहां एक ओर देश में स्थाई नौकरियां बहुत कम रह गई है। जो नौकरियां बची भी है उनमें प्रतियोगिता बहुत ही ज्यादा है। ऐसे में छात्र जब परीक्षा में बैठता है तो वह एक़ बेहतर जिंदगी का सपना देख रहा होता है।लेकिन पेपर लीक, भर्ती में देरी, एग्जाम को टालना, रिजल्ट घोषित करने में देरी जैसी घटनाएं उनके सपनों को तोड़ देती है। यही कारण है कि देश का छात्र नौजवान लंबे समय से महंगी शिक्षा, शिक्षा के निजीकरण, नौकरियों के ठेकाकरण, भर्ती को टालने, रिक्त पद ना भरे जाने से पहले ही परेशान था। लेकिन लगातार होने वाले पेपर लीक से उसके सब्र का बांध टूट गया। व्यवस्था की इन खामियों का ही परिणाम है कि आज देश का छात्र नौजवान सड़कों पर है।
मोर्चा के अध्यक्ष चरन सिंह ने कहा कि इस आंदोलन की मुख्य मांग देश की केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है । यह मांग इसलिए पैदा हुई है कि पिछले सालों में कई पेपर लीक हुए हैं। नीट पेपर लीक ने वर्षों से छात्रों के अंदर पनप रहे आक्रोश को सड़क पर ला दिया है। देश की शिक्षा व्यवस्था की इन अनियमितताओं की सरकार और उसके मंत्री जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं ।
क्रान्तिकारी लोक अधिकार संगठन के सतीश ने कहा कि देश के जाने माने पर्यावरणविद , वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई छात्र नेता जंतर मंतर पर अनशन पर बैठ थे। बीस दिन के लंबे अनशन के बाद भी सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बात करने नहीं आया। एक रात को दिल्ली पुलिस सिविल ड्रेस में आकर सोनम वांगचुक जी को जबरन धरना स्थल से उठा ले गई। अन्य कार्यकर्ताओं के साथ धक्का मुक्की की गई। यह कार्यवाही संघर्ष करने के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
आशा यूनियन की मुनीशा देवी ने कहा कि 20 जुलाई को आंदोलनकारियों ने संसद मार्च का आह्वान किया था। इसके लिए देश कोने कोने से हजारों छात्र नौजवान 19 जुलाई से ही जंतर मंतर पर जुटने लगे। शासन प्रशासन की तैयारी इस शांतिपूर्ण आंदोलन के साथियों से बातचीत के बजाए इनके मार्च को रोकने की थी । प्रदर्शकारियों को बैरिकेड लगाकर रोका जाने लगा। अंत में शांतिपूर्ण संसद मार्च पर लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले दागे गए। हम छात्रों नौजवानों के इस न्यायपूर्ण आंदोलन में निर्मम दमन की कड़ी निंदा करते हैं।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि न्यायपूर्ण आंदोलनों के दमन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार का हनन है। इसलिए हम मांग करते हैं कि आंदोलनरत छात्रों नौजवानों की मांगों को पूरा किया जाए। और दिल्ली पुलिस द्वारा की गई दमनात्मक कार्यवाही की न्यायिक जांच कराई जाए।
कार्यक्रम में प्रेमपाल सिंह, चरन सिंह यादव,मुनीश देवी, डॉ सतीश, राम प्रकाश पूर्व प्रवक्ता, आर के जौहरी, एड सी एल गौतम, एड एस पी सिंह, एड वीरेंद्र जाटव, ओमेंद्र सिंह निर्दोष राठौर, नीलम, गिरिजा, अल्का, विनीता , राजकुमारी, रचना, आदि लोग उपस्थित रहे।




