जनहित सत्याग्रह मोर्चा, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन एवं उo प्रo पॉवर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ के संयुक्त प्रतिनिध मंडल द्वारा राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा
बिसौली से शिशुपाल सागर की रिपोर्ट
बिसौली – जनहित सत्याग्रह मोर्चा, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन एवं उत्तर प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ के संयुक्त प्रतिनिध मंडल द्वारा राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी के क्षेत्र में होने के कारण नायब तहसीलदार अनंगराज सिंह को सौंपा गया। ज्ञापन देते समय साथी हर्षवर्धन ने कहा कि बार – बार पेपर लीक होने से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है।आज जहां एक ओर देश में स्थाई नौकरियां बहुत कम रह गई है।ज्यादातर काम सरकार ठेके पर करवा रही है । जो नौकरियां बची भी है उनमें प्रतियोगिता बहुत ही ज्यादा है । इन परीक्षाओं के पास करने के लिए छात्रों को दिन रात मेहनत करनी पड़ती है।इसके अलावा यही हाल प्रतियोगी परीक्षाओं का है। ऐसे में छात्र जब परीक्षा में बैठता है तो वह एक़ बेहतर जिंदगी का सपना देख रहा होता है।लेकिन पेपर लीक, भर्ती में देरी, एग्जाम को टालना, रिजल्ट घोषित करने में देरी जैसी घटनाएं उनके सपनों को तोड़ देती है। यही कारण है कि देश का छात्र नौजवान लंबे समय से महंगी शिक्षा, शिक्षा के निजीकरण, नौकरियों के ठेकाकरण,भर्ती को टालने,रिक्त पद ना भरे जाने से पहले ही परेशान था। लेकिन लगातार होने वाले पेपर लीक से उसके सब्र का बांध टूट गया। व्यवस्था की इन खामियों का हो परिणाम है कि आज देश का छात्र नौजवान सड़कों पर है। लंबे समय से अनशन पर है।
वक्ताओं ने कहा कि इस आंदोलन की मुख्य मांग देश की केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है । यह मांग इसलिए पैदा हुई है कि पिछले सालों में कई पेपर लीक हुए हैं। नीट पेपर लीक ने वर्षों से छात्रों के अंदर पनप रहे आक्रोश को सड़क पर ला दिया है। देश की शिक्षा व्यवस्था की इन अनियमितताओं की सरकार और उसके मंत्री जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं । यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
इन समस्याओ से तंग आकर देश के जाने माने पर्यावरणविद , वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई छात्र नेता जंतर मंतर पर अनशन पर बैठ गए। बीस दिन के लंबे अनशन के बाद भी सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बात करने नहीं आया। यह देश में संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।लोकतंत्र में इस तरह के न्यायपूर्ण संघर्षों में सरकार को बात करनी पड़ती थी।लेकिन आजकल बात करने के बजाए आंदोलनों का दमन किया जा रहा है।इसी कड़ी में 17 जुलाई 2026 की रात में दिल्ली पुलिस सिविल ड्रेस में आकर सोनम वांगचुक जी को जबरन धरना स्थल से उठा ले गई। अन्य कार्यकर्ताओं के साथ धक्का मुक्की की गई। दिल्ली पुलिस का यह व्यवहार सरकार के इसारे पर किया गया है। यह कार्यवाही संघर्ष करने के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। हमारा कहना है कि सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर संघर्ष कर रहे साथियों से बात करनी चाहिए, ना कि उनसे जबरन आंदोलन खत्म कराने की कोशिश।
आज 20 जुलाई को आंदोलनकारियों ने संसद मार्च का आह्वान किया था। इसके लिए देश कोने कोने से हजारों छात्र नौजवान 19 जुलाई से ही जंतर मंतर पर जुटने लगे। शासन प्रशासन की तैयारी इस शांतिपूर्ण आंदोलन के साथियों से बातचीत के बजाए इनके मार्च को रोकने की थी । प्रदर्शकारियों को बैरिकेड लगाकर रोका जाने लगा। यह कार्यवाही इस बात को गवाह है कि सरकार न्यायपूर्ण आंदोलनों को कुचलना चाहती है। लेकिन जनता जब अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान पर उतरती है तो अच्छे अच्छे तानाशाहों गुरूर टूटते देखा है।
आज जरूरत है छात्रों नौजवानों के भविष्य को बचाने के लिए इस न्यायपूर्ण संघर्ष का सहयोग और समर्थन किया जाए। ज्ञापन देने वालों में में इंजीनियर हर्षवर्धन,देवेंद्र सिंह,कुंवरपाल, गौरव कुमार, इमरान खान,अनिल कुमार यादव,ओम शंकर प्रजापति, सत्येंद्र यादव,रुपेश कुमार आदि लोग मौजूद थे।



