जिला में बंदरों के रेस्क्यू एवं संरक्षण के लिए जिला स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश!

सम्भल जिला मुख्यालय पर आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के निर्देशन एवं मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट की अध्यक्षता में जनपद में बंदरों के रेस्क्यू, सुरक्षित स्थानों पर संरक्षण तथा संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में बंदरों से संबंधित समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए जिला एवं तहसील स्तर पर समिति गठित करने तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए।बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी प्रीति यादव ने बताया कि जनपद में बंदरों को पकड़ने एवं उनका रेस्क्यू करने के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।इस कार्य के लिए वन विभाग नोडल विभाग होगा। तहसील स्तर पर वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी समिति के सदस्य होंगे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज विभाग के जिला पंचायत राज अधिकारी एवं संबंधित विकासखंडों के सहायक विकास अधिकारी पंचायत सहित अन्य संबंधित अधिकारी समिति में शामिल रहेंगे।उन्होंने बताया कि तहसील स्तर पर रेस्क्यू किए गए बंदरों को कहां छोड़ा जाएगा, इसका निर्धारण संबंधित तहसील के नोडल अधिकारी करेंगे। इस संबंध में निर्धारित प्रारूप पर रेस्क्यू एवं अन्य आवश्यक विवरण दर्ज किए जाएंगे तथा संबंधित समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर के उपरांत रिपोर्ट नोडल विभाग को भेजी जाएगी।
प्रभागीय वनाधिकारी ने निर्देश दिए कि बंदरों से संबंधित किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल संबंधित नोडल अधिकारी को अवगत कराया जाए इसके बाद समिति के सभी सदस्यों के समन्वय एवं सहयोग से नियमानुसार रेस्क्यू की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने नगर निकायों में बंदरों के लिए उपयुक्त मंकी डस्टबिन लगाने तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नगर पालिका एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में कूड़ेदानों को ढककर रखा जाए, ताकि बंदर कचरे को इधर-उधर न फैला सकें और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो।मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आपसी समन्वय स्थापित करते हुए इस कार्य को प्रभावी एवं सफल बनाया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों से संबंधित सूचना प्राप्त होने पर पंचायती राज विभाग संबंधित समिति के सहयोग से रेस्क्यू की कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा चिन्हित सुरक्षित स्थानों पर ही रेस्क्यू किए गए बंदरों को रखा जाए अथवा छोड़ा जाए, ताकि उनके संरक्षण एवं सुरक्षा की उचित व्यवस्था हो सके।
मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद में फलदार वृक्षों के रोपण पर भी जोर दिया, जिससे बंदरों को भोजन उपलब्ध हो सके। उन्होंने बंदरों के संरक्षण के उद्देश्य से जनपद में ‘किष्किंधावन’ विकसित करने की आवश्यकता बताई, ताकि उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण एवं सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा सके।इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी प्रीति यादव, उप कृषि निदेशक अरुण कुमार त्रिपाठी, जिला कृषि अधिकारी प्रबोध कुमार मिश्रा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
