समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा की तृतीय पुण्यतिथि पर एक शाम दिनेश चंद्र शर्मा के नाम काव्य निशा कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का हुआ आयोजन।
बिसौली से शिशुपाल सागर की रिपोर्ट
जब भी होता है कभी दिल जो परिशां मेरा
देख लेता हूं मैं तस्वीर तुम्हारी पापा
बदायूं गौरव क्लब,दिनेश चंद्र शर्मा स्मृति सेवा समिति एवं बदायूं गौरव महोत्सव समिति द्वारा बदायूं गौरव क्लब के संरक्षक समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा की तृतीय पुण्यतिथि पर ठाकुर जी महाराज मंदिर मोहल्ला चौबे मे एक शाम समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा के नाम काव्य निशा कवि सम्मेलन एवं मुशायरे एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ कार्यक्रम के अध्यक्ष शायर अहमद अमज़दी बदायूंनी, मुख्य अथिति समाजसेवी गीता शर्मा,मुख्य अथिति शायर हिलाल बदायूनी ,भाजपा नेता
एवं बदायूं गौरव क्लब के मुख्य सचिव पं अमन मयंक शर्मा एवं समाजसेवी अशोक गुप्ता ने माँ सरस्वती एवं समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।इसके उपरांत समस्त कवियों ,शायरों एवं उपस्थित जनों ने समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर उनको नमन किया।कार्यक्रम में सर्वप्रथम कवियित्री सरिता चौहान ने सरस्वती वंदना का पाठ किया ।इसके उपरांत कार्यक्रम के अध्यक्ष उस्ताद शायर अहमद अमज़दी बदायूंनी ने पड़ा-“उसकी हर एक बात पे करता रहा यक़ीन
अहमद फरेब इसलिए खाता चला गया।”
अतंर्राष्ट्रीय शायर हिलाल बदायूनी ने अपने शेरो से समा बाँध दिया।उन्होंने पड़ा-‘मैं कर रहा हूँ इसलिए हंसने की कोशिशें ,
मुझको उदास देखके महफ़िल उदास है ।
भाजपा नेता एवं राष्ट्रीय कवि पं अमन मयंक शर्मा ने अपने पिता समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा को नमन करते हुए पड़ा-” भूल सकता नहीं मांझी की कहानी पापा।
याद आती है हर इक बात पुरानी पापा ।
जब भी होता है कभी दिल जो परिशां मेरा,
देख लेता हूं मैं तस्वीर तुम्हारी पापा।”
उस्ताद शायर सुरेंद्र नाज ने पड़ा-”
घर बैठे कब पेट में दाना पड़ता है
रोज़ का खाना रोज़ कमाना पड़ता है।
जंग किसी मुद्दे का हाल कब होती है,
आख़िर में बस मेज़ पे आना पड़ता है।
कवि सुनील शर्मा समर्थ ने पड़ा-”
कर्म के आधार पर अधिकार होना चाहिए।
खोखली बातें हों तो प्रतिकार होना चाहिए।”
कवि शैलेन्द्र देव मिश्रा ने पड़ा-“मन की करना तो सब चाहें मन से कुछ करता है कौन,
झोली भरना तो सब चाहें झोली खाली रखता कौन।”
कवि राजवीर तरंग ने पड़ा-” मेरे घर की आन पिताजी, मेरे घर की शान पिताजी।
मिला मुझे उनसे यह जीवन, हैं मेरी पहचान पिताजी।।”
कवि अचिन मासूम ने पड़ा-”
मेरा बीता हुआ कल है सुनहरा आज है पापा ।
मेरी हर एक कहानी का सुखद आगाज है पापा ।”
कवि आकाश पाठक परौली ने समाजसेवी दिनेश चंद शर्मा को याद करते हुए पड़ा- ” पिता को जान कर देखो, पिता भगवान होता है।
मां का हक देह पर होता, पिता तो प्राण होता है।
शायर शम्स मुजाहिदी ने पड़ा-“अंधेरे में उजाला कर रही है,
हक़ीक़त में ये लड़की फुलझड़ी है।
वो जब बजती है राधा नाचती है,
कन्हैया की सुरीली बांसुरी है।”
कवि ओजस्वी जौहरी सरल ने पड़ा-“सब कुछ ही जीत कर मैं सब कुछ ही हार आया,
सब कुछ लुटा के तुम पर खुद को विसार आया।”
इसके अलावा कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में कवि अनिल रस्तोगी,
कवियित्री सरिता चौहान,कवियित्री दीप्ति सक्सेना,शायर अच्छन बाबू,
कवि अजीत सुभाषित,कवि विवेक यादव अज्ञानी,शायर अमान फर्रुखाबादी ने भी काव्य पाठ किया।भाजपा नेता एवं बदायूं गौरव क्लब के मुख्य सचिव राष्ट्रीय कवि अमन मयंक शर्मा,बदायूं गौरव क्लब की महिला अध्यक्ष गीता शर्मा,सहसचिव गौरव पाठक एवं समाजसेवी अशोक गुप्ता ने समस्त कवियों एवं शायरों को
समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा स्मृति साहित्य रत्न सम्मान से फूलमाला पहनाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर
सम्मानित किया।भाजपा नेता पं अमन मयंक शर्मा ने समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा स्मृति सम्मान 2025 की घोषणा करते हुए इस वर्ष का सम्मान साहित्य के क्षेत्र मे उस्ताद शायर अहमद अमज़दी
बदायूंनी एवं साहित्य एवं समाजसेवा के क्षेत्र में हिलाल बदायूनी को शाल उड़ाकर ,फूलमाला पहनाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर प्रदान किया एवं सम्मानित किया।अंत मे पं अमन मयंक शर्मा ने प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि वह बदायूं गौरव क्लब के संरक्षक समाजसेवी दिनेश चंद्र शर्मा की जयंती एवं पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष साहित्यिक,सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजन करेंगे।
इस अवसर पर कार्यक्रम की संरक्षक गीता शर्मा,सहसचिव गौरव पाठक
अंजलि मिश्रा,चर्चा पाठक,प्रज्ञा अमन मयंक पाठक,
वैदिक पाठक,नियति मिश्रा,काव्या पाठक,काशी पाठक,माधुरी गुप्ता,राधा गुप्ता,अजय शर्मा,कृष्ण अवतार शर्मा,नितिन तिवारी,सुमित मिश्रा,रमेश गुप्ता,लव गुप्ता,गिरीश कश्यप,आशीष गुप्ता,राजू शर्मा
सहित सैकड़ो श्रोतागण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन कवि सुनील शर्मा समर्थ ने किया।




