सम्भल : रविवार को मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम के संस्थापक हज़रत “मुफ़्ती अजमल शाह क़ादरी” का 65 वां उर्स पूरी शान से मनाया गया।आज क़ुल शरीफ़ की तक़रीब में हज़ारों अकीदतमंदों की भीड़ जमा हुई। प्रोग्राम का आग़ाज़ क़ुरआने पाक की तिलावत से क़ारी सरताज ने किया। अयाज़ अजमली ने हम्द और उसामा अजमली ने नाते पाक पेश की।सैफ़ुल्लाह सुल्तानी व असद अशरफ़ी ने मनक़बत का नज़राना पेश किया। मुफ़्ती आलम नूरी ने कहा “मुफ़्ती अजमल शाह क़ादरी” शहर सम्भल में नहीं बल्कि अपने वक़्त में पूरे हिन्दुस्तान के बहुत बड़े आलिम थे बड़े मुफ़्ती थे। सदरुल अफाज़िल हज़रत सय्यद नईमुद्दीन मुरादाबादी के शागिर्द हैं, आपको अपने उस्ताद से बहुत लगाव था और उस्ताद भी अपने इस ख़ुसूसी शागिर्द को ख़ूब नवाज़ते थे। एक बार मुफ़्ती अजमल शाह ने मदीना शरीफ़ में एक ग़ैर मुक़ललिद से मुनाज़िरा किया और उसको वहीं की भाषा अरबी भाषा में ही उसको हराया।
इसके बाद मरकज़ी कमेटी की जानिब से हज का काम करने के लिए, हाजियों की ख़िदमत करने के लिए तक़ी अशरफ़ एडवोकेट, अब्दुल ख़ालिक़, क़ारी वसी अशरफ़, मुहम्मद नदीम, मुहम्मद अहमद रज़ा को सम्मानित किया गया,
शहर मुफ़्ती क़ारी अलाउद्दीन अजमली की लिखी किताब “ख़ुत्बाते अजमली” का रस्मे इजरा हुआ-
बनारस से आए दूसरे मुख्य वक्ता मुफ़्ती आसिफ़ मिस्बाही ने कहा कि मुफ़्ती अजमल शाह बहुत बड़े विद्वान थे, मैं मॉरीशस में रहा वहाँ भी किसी को अगर कोई मसला पेश आता है तो लोग हज़रत मुफ़्ती अजमल शाह साहब के फ़तावा अजमलिया से मसले का हल तलाश करते हैं। मुफ़्ती अजमल शाह को कभी दुनियावी माल का लालच नहीं रहा, आज से सौ साल पहले एक बार निज़ाम हैदराबाद ने शाह साहब को ख़त भेजा और हैदराबाद आने को कहा जिसके बदले 500 रुपये तनख़्वाह और चारमीनार पर सौ दुकानें देने का वादा किया। लेकिन शाह साहब ने सम्भल नहीं छोड़ा अपने लोगों के लिए यहाँ ही रहे और लोगों को इल्म के लिए मरकज़ बनाया।
सलातो सलाम के बाद क़ारी तनज़ीम अशरफ़ अजमली ने मुल्क व क़ौम की सलामती के लिए दुआ करायी।
पूरे प्रोग्राम की व्यवस्था तक़ी अशरफ़ एडवोकेट, गुलवेज़ क़मर, नजी अशरफ़, अली अशरफ़ ने संभाली।मोहल्ला खग्गू सराय के सरफ़राज़ अजमली और सुब्हान अजमली और बाक़ी लोगों की जानिब से उर्स में आए तमाम लोगों को लंगर खिलाया गया। क़ादरी नौशाही टीम और सरताज साहब की जानिब से चादर पेश की गयी।प्रोग्राम में सांसद सम्भल ज़ियाउर रहमान बर्क़, चेयरपर्सन प्रतिनिधि चौधरी मुशीर खान, सय्यद यज़दानी मियाँ, सय्यद शामी मियाँ, सय्यद आमिर मियाँ, सय्यद रिज़वानी मियाँ, सय्यद फ़ैसल मियाँ, मुफ़्ती महबूब वास्ती, मुफ़्ती नूर आलम, मुफ़्ती मेहबूब, मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन, मुफ़्ती मेहबूब मरकज़ी, इमामे ईदगाह मौलाना ज़हीरुल इस्लाम, क़ारी ग़ुलाम मुदस्सिर, मौलाना शमशाद, मौलाना इब्ने अली, मौलाना अज़ीम अशरफ़, क़ारी हनीफ़, क़ारी मुअज़्ज़म, क़ारी बदरे आलम, पीर तालिब हुसैन, क़ारी वसीम, मौलाना इकराम, मौलाना इमरान, मौलाना शमशाद हनफ़ी, मौलाना अब्दुल हफ़ीज़, क़ारी कलीम, क़ारी रिज़वान, मौलाना आसिम, मौलाना शरीफ़, मौलाना मुजीब, असद अब्दुल्लाह, ज़फ़र अली एडवोकेट, शकील अशरफ़ी एडवोकेट, शहज़ाद ख़ाँ, चौधरी अशरफ़ अली एडवोकेट, चौधरी शरफ़ अली, * मुरादाबाद मण्डल तथा राजस्थान, बिहार, बंगाल से बहुत से लोग मौजूद रहे। मदरसा कमेटी से हाजी ज़फ़ीर अहमद, सय्यद अब्दुल क़दीर, फ़रीद एडवोकेट, हाजी यामीन, मुहम्मद हाशिम ने आने वाले लोगों का शुक्रिया अदा किया।
(सम्भल से लल्ला सलमानी की रिपोर्ट)
